चोला समाज सेविका का, लेकिन करतूत घिनौनी। राजधानी में बच्चों की खरीद-फरोख्त का पर्दाफाश करते हुए क्राइम ब्रांच ने अनाथालय व रैन बसेरा चलाने वाली दो महिलाओं एवं एक डॉक्टर समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया है। उनके कब्जे से आठ बच्चे व 12 दिन के दो शिशु मुक्त कराए हैं। डॉक्टर रुपये की एवज में फर्जी डिलेवरी सर्टिफिकेट प्रदान करता था। बच्चा उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी एक देह व्यापार का दलाल निभाता था। बच्चे पश्चिम बंगाल के संपर्को से लाए जाते थे। एक बच्चे को उसके माता-पिता ने 30 हजार में गिरोह को बेच दिया था। क्राइम ब्रांच बरामद बच्चों के माता-पिता के बारे में जानकारी जुटा रही है। पुलिस उपायुक्त अशोक चांद (क्राइम) के अनुसार सूचना मिली थी कि राजधानी में बच्चों की खरीद-फरोख्त करने वाला गिरोह सक्रिय है। इसमें कई सफेदपोश शामिल हैं। टीम ने जांच शुरू की। रविवार को सूचना के आधार पर टीम ने शिवाजी विहार में रंजीता भसीन (48) को आठ माह का बच्चा सौंपते हुए पवन शर्मा (38) को दबोचा गया। रंजीता रघुवीर नगर में 1998 से नव रोशनी चेतना महिला समिति तथा नव ज्योति अनाथालय चलाती है। रोहिणी निवासी पवन देह व्यापार के धंधे में लिप्त है। उपायुक्त के अनुसार बच्चा पश्चिम बंगाल से एक व्यक्ति ने डेढ़ लाख में दो माह पूर्व दिल्ली आकर उसे सौंपा था। बच्चे के लिए आगे ग्राहक तलाशने की जिम्मेदारी रंजीता की थी। लिहाजा पवन उसे बच्चा सौंपने आया था। पवन ने खुलासा किया कि 12 दिन पहले पूर्वी दिल्ली से उसने माता-पिता से 30 हजार रुपये में बच्ची खरीदकर रंजीता को सौंपी थी। रंजीता ने बताया कि उसने बच्ची मधु विहार, द्वारका निवासी शोभा गुप्ता को दी। शोभा वशिष्ठ पार्क इलाके में चाइल्ड केयर नामक एनजीओ तथा एक रैन बसेरा चलाती है। शोभा को गिरफ्तार किया गया तो उसने बताया कि बाल विहार में काम करने वाली अनुपमा के माध्यम से उसने 1. 80 लाख में बच्ची विकासपुरी निवासी महिला को बेच दी थी। महिला ने उसे कहा था कि उसे वैध प्रक्रिया के तहत बच्चा चाहिए। शोभा ने महिला से एडवांस लेकर प्रशांत विहार में क्लीनिक चलाने वाले डाक्टर अतुल कुमार से महिला का फर्जी डिलीवरी सर्टिफिकेट बनवाया। डा. अतुल ने 20 हजार रुपये में महिला को 11 दिसंबर को अपने क्लीनिक में भर्ती दिखाकर बच्ची की डिलीवरी दिखाई थी। 12 दिसंबर को कागजों में महिला की छुट्टी दिखाई थी। पुलिस ने डा. अतुल को गिरफ्तार कर क्लीनिक से सारा रिकार्ड जब्त कर लिया। बरामद बच्चों को सफदरजंग इंक्लेव स्थित एसओएस उपवन होम में रखा गया है। उपायुक्त के अनुसार बच्ची बेचने से मिले 1.80 लाख रुपये में से 30 हजार बच्ची के परिजनों को दिए गए, 25 हजार पवन शर्मा ने लिए, रंजीता को 10 हजार, शोभा गुप्ता को 75 हजार, अनुपमा लाल को 20 हजार तथा डाक्टर अतुल को 20 हजार रुपये मिले थे। क्राइम ब्रांच की टीमें रंजीता तथा शोभा की संस्थाओं का रिकार्ड चेक कर रही हैं। पुलिस को अंदेशा है कि रंजीता ने अनाथालय का लाइसेंस नहीं लिया था। गैर कानूनी रूप से वह इसे चला रही थी।