सरकारी योजनाओं में फर्जीवाड़ा व घोटाले के लिए चर्चित पश्चिमी सिंहभूम में संपूर्ण स्वच्छता मिशन के अंतर्गत बीपीएल-एपीएल के लिए बने शौचालयों में बड़ी गड़बड़ी सामने आयी है। कागजों में ही शौचालयों को पूर्ण दिखाकर न सिर्फ संबंधित एनजीओ ने सारी राशि उठा ली, बल्कि केंद्र सरकार से निर्मल ग्राम का पुरस्कार भी झटक लिया। जिन गांवों को निर्मल ग्राम घोषित किया गया है, वहां शौचालय पूरे हुए ही नहीं। जहां हुए भी, वहां उनका होना न होना बराबर है। इस तथ्य का खुलासा होने के बाद पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने निर्मल ग्राम पुरस्कार के तहत मिलने वाली राशि पर रोक लगा दी है। पुन: निरीक्षण ने खोली पोल : पश्चिमी सिंहभूम में वर्ष 2008 में कुमारडुंगी प्रखंड की कुमारडुंगी, बाईहातु व झींकपानी की जोड़ापोखर पंचायत को निर्मल ग्राम का दर्जा दिया गया था। तत्कालीन उपायुक्त सुनील कुमार के नेतृत्व में गई एक टीम दिल्ली से निर्मल ग्राम का पुरस्कार भी जीत लाई थी। हाल ही में जब उक्त निर्मल ग्राम को पांच लाख प्रति ग्राम के हिसाब से 15 लाख रुपये केंद्र सरकार की ओर से आवंटित किए गए तो विभाग द्वारा संबंधित गांवों का पुन: निरीक्षण किया गया। तीन साल बाद इन गांवों की जो तस्वीर सामने आई, उसे देखकर पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के पदाधिकारियों के कान खड़े हो गए। पदाधिकारियों ने रिपोर्ट मुख्यालय रांची को दी। रिपोर्ट के आधार पर पुरस्कार राशि के भुगतान पर रोक लगा दी गई है। एनजीओ ने कराया काम : कुमारडुंगी व बाईहातु पंचायत में स्वयंसेवी संस्था सीएसडब्ल्यूआर ने काम कराया था। विभाग के आंकड़ों के अनुसार कुमारडुंगी में 800 घरों में शौचालय बनाए गए थे। इसके एवज में विभाग ने संस्था को 18 लाख तीन हजार और बाईहातु में 826 शौचालयों के एवज में कुल 18 लाख 17 हजार 200 तथा जोड़ापोखर में 456 घरों में शौचालय निर्माण कराने की एवज में आइपीएसईआर नामक संस्था को 2200 के हिसाब से कुल 10 लाख 32 सौ रुपये भुगतान किए गए थे। शौचालयों की ताजा स्थिति को देखकर इन एनजीओ के काम का अंदाजा लगाया जा सकता है।